यह संस्था मुख्य रूप से समाज के गरीब, विधवा, महिला सुरक्षा, दिव्यांग, कमजोर वर्गों के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, नैतिक विकास हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन करती है।
संस्था शिक्षित, विधवा, महिला, दिव्यांग युवक-युवतियों को स्वावलम्बी बनाने हेतु टंकण कला, आशुलिपि, कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, तकनीकी, गैर तकनीकी एवं अन्य प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण देती है तथा स्वावलम्बी बनने में मदद करती है।
महिलाओं को रोजगारोन्मुख बनाने हेतु सिलाई, कटाई, बुनाई, पेंटिंग, मधुबनी पेंटिंग, एप्लिक, सौंदर्य, प्रसाधन एवं अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करती है और उन्हें स्वावलम्बी बनने में सहायता करती है।
महिलाओं के चौमुखी विकास हेतु महिला मंडल, स्वयं सहायता समूह, महिला सशक्तिकरण आदि कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है।
समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल-विवाह, वेश्यालयवृत्ति, दहेज-प्रथा, सम्प्रदायवाद इत्यादि की समाप्ति के लिए संगोष्ठियों, शिविरों, पदयात्राओं, प्रतियोगिताओं आदि का आयोजन किया जाता है।
लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाती है। परिवार कल्याण शिविर, टीकाकरण शिविर एवं अन्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है। साथ ही, स्वास्थ्य केंद्र की साफ-सफाई एवं अन्य कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है।
गरीब एवं नि:सहाय लोगों के आर्थिक विकास हेतु लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, पशुपालन, डेयरी उद्योग, फल एवं खाद्य पदार्थ प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें स्वावलम्बी बनने में सहायता की जाती है। जनवितरण प्रणाली से संबंधित कार्य भी किए जाते हैं।
नेत्रहीन, मूक-बधिर, शारीरिक रूप से दिव्यांग एवं मानसिक रूप से अविकसित बच्चों तथा लोगों के शैक्षणिक विकास हेतु कार्य किया जाता है। उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती हैं और उनके रखरखाव हेतु भी काम किया जाता है।
पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने हेतु वृक्षारोपण और अन्य कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। मलिन बस्ती, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। लोगों को स्वच्छ पेयजल, शौचालय आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
पंचायती राज, उपभोक्ता अधिकार, मानवाधिकार, सूचना का अधिकार, उपभोक्ता संरक्षण आदि विषयों पर लोगों को जानकारी दी जाती है और उन्हें जागरूक किया जाता है।
प्राकृतिक आपदा एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में अनेक जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है और पीड़ित जन समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान की जाती है।
वृद्ध, अनाथ बच्चे, विद्यार्थी, प्रवासी, परिजन एवं असहाय लोगों के लिए कल्याणकारी कार्य किए जाते हैं। उनके लिए आवास, भोजन, शिक्षा, चिकित्सा आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बाल-श्रमिकों के कल्याणार्थ कार्यक्रम, शिक्षा, भोजन, पुनर्वास और सेवागृह की व्यवस्था की जाती है। असहायों के पुनर्वास हेतु उच्च स्तर पर कार्य किया जाता है।
असहाय पशुओं की समुचित देख-रेख, चिकित्सा एवं सुरक्षा हेतु अभियान चलाया जाता है।
लोगों के शारीरिक एवं मानसिक विकास हेतु योगशाला एवं व्यायामशाला का संचालन किया जाता है।
पुस्तकालय, वाचनालय, संगीतालय का संचालन किया जाता है। पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन, वितरण एवं संग्रह किया जाता है। नाटक, नृत्य, संगीत एवं वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
राष्ट्रीय एकता, आपसी सद्भावना और धर्मनिरपेक्षता के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है और जातीय भेदभाव समाप्त करने हेतु विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
संस्था विधिसम्मत तरीकों से सहयोग राशि अथवा अन्य माध्यमों से धनराशि प्राप्त कर अपने उद्देश्यों की पूर्ति करती है।
रक्तदान शिविरों का आयोजन कर एकत्र रक्त को ब्लड बैंक तक पहुंचाया जाता है।
समाज में व्याप्त निरक्षरता के उन्मूलन हेतु शिक्षा संबंधी विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं। मेधावी एवं गरीब छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित किया जाता है तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहयोग किया जाता है।
संस्था पात्र व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में सहयोग करती है तथा योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर जन-जन तक पहुंचाती है।
अखिल भारतीय दिव्यांग संघ महिला सुरक्षा सेवा संगठन में सभी लेन-देन एकाउंट के माध्यम से किए जाएंगे। नकद लेन-देन की संस्था कोई जिम्मेदारी नहीं लेगी। नकद लेन-देन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी और वह व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होगा।